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तेलंगाना दुष्कर्म / सबूतों की तलाश में आरोपियों को साथ लाए थे, हम पर हमला कर भागने लगे तो गोली मारी: पुलिस

तेलंगाना दुष्कर्म / सबूतों की तलाश में आरोपियों को साथ लाए थे, हम पर हमला कर भागने लगे तो गोली मारी: पुलिस

  • आरोपियों ने दो पुलिसवालों से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की, जवाबी गोलीबारी में चारों मारे गए- पुलिस
  • साइबराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने कहा- वेटरनरी डॉक्टर का सेल फोन जरूरी था, हमें वह मिल गया है
  • आरोपियों ने पहले डॉक्टर की हत्या की और उसके बाद शव को जला दिया- पुलिस

Dainik Bhaskar

Dec 06, 2019, 06:52 PM IST
नई दिल्ली/हैदराबाद. तेलंगाना में वेटरनरी डॉक्टर से दुष्कर्म के चारों आरोपियों को पुलिस ने शुक्रवार तड़के उसी जगह एनकाउंटर में मार गिराया, जहां पीड़ित को जिंदा जलाया गया था। पुलिस ने बताया कि री-क्रिएशन के दौरान आरोपियों ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में की गई फायरिंग में चारों आरोपी मारे गए। साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने कहा कि सबूतों की तलाश में आरोपियों को लेकर आए थे। उन्होंने कबूल किया कि डॉक्टर को पहले मारा था और फिर उसका शव जला दिया था। जांच के दौरान इन आरोपियों ने दो पुलिसवालों के हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और जवाबी कार्रवाई में मारे गए। 
एनकाउंटर में शामिल सज्जनार ने कहा- कानून ने अपना काम किया
पुलिस कमिश्नर सज्जनार ने शुक्रवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया- आरोपियों मोहम्मद आरिफ, जोलू शिवा, जोलू नवीन और चिंताकुंटा चेन्नाकेशवुलु की कस्टडी मिलने के बाद हमने 4 और 5 दिसंबर को पूछताछ की। सबूतों की तलाश में घटनास्थल पर लेकर आए थे। हमारी टीम में 10 पुलिसवाले थे। आरोपियों ने दो पुलिसकर्मियों से हथियार छीनकर फायरिंग शुरू कर दी थी। उन्होंने पत्थर भी फेंके। हमने सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन वे फायरिंग करते रहे। जवाबी कार्रवाई में वे मारे गए। कानून ने अपना काम किया। 

"हमारे लिए डॉक्टर के सेल फोन को बरामद करना जरूरी था। आरोपियों ने डॉक्टर की हत्या के बाद उसका फोन झाड़ियों में छिपा दिया था। हमने सेल फोन बरामद कर लिया है।"

9 दिन में इंसाफ की कहानी के 7 अहम मोड़
हैवानियत का यह मामला 27 नवंबर की रात से शुरू हुआ था और 6 दिसंबर को इंसाफ हो गया। दुष्कर्म और हत्या के मामले में 9 दिन के भीतर 7 अहम मोड़ आए। 
पहला मोड़: 27 नवंबर
इसी दिन 26 वर्षीय वेटरनरी डॉक्टर हैदराबाद-बेंगलुरु हाईवे के टोल प्लाजा पर आखिरी बार देखी गई थी। उसने फोन पर अपनी बहन से बात की थी कि कुछ लोग हैं, जिससे उसे डर लग रहा है। इसके बाद डॉक्टर का फोन स्विच्ड ऑफ हो गया और उसका किसी से संपर्क नहीं हो पाया। 
दूसरा मोड़: 28 नवंबर
टोल प्लाजा से करीब 30 किमी दूर हाईवे के अंडर ब्रिज के नीचे वेटरनरी डॉक्टर का जला हुआ शव मिला। जांच में पता चला कि दुष्कर्म के बाद डॉक्टर को जलाकर मार डाला गया। 
तीसरा मोड़: 29 नवंबर
पुलिस टोल प्लाजा और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। पुलिस को जानकारी मिली की एक ट्राला यहां करीब 8 घंटे तक खड़ा रहा। इसी आधार पर पुलिस ने छानबीन शुरू की और ट्राले के ड्राइवर और 3 हेल्परों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। यहां इन आरोपियों ने जुर्म कबूल कर लिया।
इसी दिन तेलंगाना के गृह मंत्री ने मो. महमूद अली ने बेतुका बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर डॉक्टर बहन को फोन करने की बजाय 100 नंबर पर फोन करती तो उसे बचाया जा सकता था।
चौथा मोड़: 30 नवंबर
तेलंगाना दुष्कर्म मामले को लेकर देशभर में प्रदर्शन हुए। जिस शादनगर पुलिस स्टेशन में आरोपियों को रखा गया था, उसे भी भीड़ ने इसी दिन घेर लिया था। इसके बाद आरोपियों को 14 दिन की न्यायाकि हिरासत में चंचलगुडा सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
पांचवां मोड़: 2 दिसंबर
संसद में जया बच्चन ने कहा कि आरोपियों को भीड़ के हवाले कर दिया जाए। एक भाजपा सांसद ने कहा कि इन आरोपियों को नपुंसक बना दिया जाए। सरकार ने कहा कि हम कड़ा कानून बनाने के लिए तैयार हैं। 
छठा मोड़: 4 दिसंबर
तेलंगाना सरकार ने फैसला किया कि दुष्कर्म मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। पुलिस अधिकारियों को भी जल्द से जल्द जांच पूरी करने के निर्देश दिए। सरकार ने 3 पुलिसकर्मियों को एफआईआर दर्ज करने में देरी के आरोप में सस्पेंड कर दिया।
सातवां मोड़: 6 दिसंबर
आरोपियों को पुलिस उसी जगह लेकर गई, जहां उन्होंने अपराध को अंजाम दिया था। पुलिस इस घटना का री-क्रिएशन करना चाहती थी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। बचाव की कार्रवाई में जब पुलिस ने गोली चलाई तो 4 आरोपी मारे गए। इसके बाद पुलिस टीम का हीरो की तरह स्वागत हुआ। उन पर फूल बरसाए गए और महिलाओं ने राखी बांधी। 

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