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तेलंगाना / कमिश्नर सज्जनार की अगुआई में 11 साल पहले भी मारे गए थे एसिड अटैक के 3 आरोपी, युवाओं के लिए 'हीरो' से कम नहीं

तेलंगाना / कमिश्नर सज्जनार की अगुआई में 11 साल पहले भी मारे गए थे एसिड अटैक के 3 आरोपी, युवाओं के लिए 'हीरो' से कम नहीं

साइबराबाद पुलिस कमिश्नर सीवी सज्जनार। (फाइल फोटो)साइबराबाद पुलिस कमिश्नर सीवी सज्जनार। (फाइल फोटो)
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  • तेलंगाना में वेटरनरी डॉक्टर की हत्या और दुष्कर्म के आरोपी शुक्रवार तड़के एनकाउंटर में मारे गए
  • पुलिस का दावा- रीक्रिएशन के दौरान आरोपी हथियार छीनकर भाग रहे थे, क्रॉस फायरिंग भी हुई
  • घटनास्थल पर पुलिस के समर्थन में नारे लगे, 2008 में भी एनकाउंटर के बाद छात्रों ने पटाखे फोड़े थे

Dainik Bhaskar

Dec 06, 2019, 11:03 AM IST
हैदराबाद. तेलंगाना में वेटरनरी डॉक्टर की हत्या और सामूहिक दुष्कर्म के चारों आरोपी शुक्रवार तड़के एनकाउंटर में मारे गए। साइबराबाद कमिश्नर सीवी सज्जनार की अगुआई में पुलिस की एक टीम आरोपियों को लेकर घटनास्थल पर पहुंची थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी रीक्रिएशन के दौरान पुलिसकर्मियों के हथियार छीनकर भाग रहे थे। इसी दौरान क्रॉस फायरिंग में ढेर हो गए। तेलंगाना में सज्जनार की छवि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की रही है। 11 साल पहले भी उन्हीं की अगुआई में एसिड अटैक के 3 आरोपी इसी तरह मारे गए थे। तब कॉलेज छात्र कई दिन तक उनसे मिलने के लिए घर पहुंचे थे।
  • सज्जनार 2008 में वारंगल के एसपी थे। तब आरोपी एस श्रीनिवास राव दो दोस्तों के साथ मिलकर इंजीनियरिंग छात्रा पर एसिड फेंका था। क्योंकि उसने श्रीनिवास का लव प्रपोजल ठुकरा दिया था। घटना से इलाके में काफी गुस्सा था। सज्जनार की अगुआई में पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन कुछ घंटे बाद ही आरोपी एनकाउंटर में मारे गए थे। 
  • इसके बाद सज्जनार कॉलेज छात्रों और इलाके के युवाओं के लिए किसी हीरो से कम नहीं थे। इस एनकाउंटर के बाद पीड़ित के कॉलेज की लड़कियां सज्जनार के घर पहुंची थीं और माला पहनाकर उनसे हाथ मिलाया था। कॉलेज में भी छात्र-छात्राओं ने मिठाइयां बांटीं और पुलिस के समर्थन में नारे लगाए थे। दुष्कर्म के आरोपियों के मारे जाने के बाद भी घटनास्थल पर पुलिस जिंदाबाद के नारे लगे।
11 साल पहले हुए एनकाउंटर की एक जैसी थ्योरी
एसिड अटैक के आरोपियों के एनकाउंटर के बाद वारंगल पुलिस ने कहा था कि घटनास्थल पर सबूत जुटाने के दौरान वे सिपाहियों के हथियार छीनकर भाग रहे थे। इसी दौरान क्रॉस फायरिंग में मारे गए। दूसरी ओर, कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना था कि जनता का गुस्सा शांत करने और त्वरित न्याय के लिए सुनियोजित तरीके से तीनों को मारा गया था।

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